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UTTARAKHAND Gk उत्तराखंड सामान्य ज्ञान
बेरोजगार उत्तराखंड का युवा वर्ग
उत्तराखंड में सेवा योजन कार्यालय में पंजीकृत बेरोजगार युवाओं की संख्या 8 लाख बताई जाती है लेकिन जमीनी हकीकत तो 10 लाख के पार जाते है जो कभी आंकड़ो में दिखाए ही नहीं जाते हैं । और जिनकी कभी गणना ही नहीं हुई ।
उत्तराखंड में प्रत्येक वर्ष केवल 1400 युवाओं को ही नौकरी मिल पाती है और बेरोजगारों की संख्या में इजाफा होना स्वाभाविक है। वर्ष 2016 के बाद बेरोजगारो की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है ।
वर्ष 2020- 21 में कोरोना महामारी के व्यापक प्रभाव से इस बेरोजगारी को अपने चरम शीर्ष पर ला कर खड़ा कर दिया है ।
आइये जानते है
उत्तराखंड में स्वरोजगार को भले ही बढ़ावा दिया जा रहा हो लेकिन उस स्वरोजगार को सिखाने के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर होना आवश्यक है । आज उत्तराखंड में सरकारी नौकरी कम और बेरोजगारी अधिक है। इस लिए स्वरोजगार क्या किया जाय जिससे एक व्यक्ति के साथ अन्य को भी रोजगार मुहैया हो सके ।।
सरकार के पास भी लगभग अपने विभागों में तय ही पद होते है और जैसे ही उन पदों के लिए विज्ञापन जारी किया जाता है तो लाखों की संख्या में उस पद के लिए आवेदन किये जाते है ।। मौजूदा हाल में कई साल से तैयारी कर रहे युवा यदि उस परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाते है तो उन्हें केवल एक हताशा ही मिलती है । उन्हें फिर अपने 2- 3 साल और अधिक मेहनत के साथ पढ़ना पड़ता है लेकिन आने वाले 3 साल में प्रतिस्पर्धा उसके 10 गुना अधिक हो जाती है ।। ये आज के मौजदा हालत हैं ।
क्या बेरोजगारों युवाओं को लगातार मेहनत करते रहना चाहिए?
यदि युवाओ को अपनी आयु के मुतबिक लगता है कि उसे और अधिक समय दे कर वह पद को हांसिल कर सकता है तो उन्हें कठोर परिश्रम करना चाहिए , जब तक उसे सफलता नहीं मिल जाती है
यदि उसे लगता मेरी आयु के मुताबिक में बेरोजगार हूँ तो उसे अपनी तैयारी के साथ किसी और कार्य को करने की दक्षता हासिल करनी होगी ।। साथ ही साथ पढाई के लिए एक वक़्त निकलना होगा , आप का परिश्रम जाया नहीं जाएगा। और मैं बेरोजगार हूँ , कुछ नहीं कर रहा हूँ, समाज मुझे क्या कहता होगा इन मानसिक भ्रांतियों से अपने मस्तिष्क को आजाद कर सकोगे - प्रवीन बर्त्वाल


