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मोनाल उत्तराखंड का राज्य पक्षी होने के साथ हिम का मोर भी कहलाता है
मोनाल विश्व की सुंदरतम पक्षियों में से एक है। इसको हिमालय मोर की संज्ञा भी प्रदान की गई है इस का वैज्ञानिक नाम लोफोफोरस इम्पेजेन्स है, ये उत्तराखंड का राज्य पक्षी है व नेपाल का राष्ट्रीय पक्षी है , इसे नेपाल की स्थानीय भाषा में मान्याल या मुन्याल कहते हैं
ये उड़ीसा के राज्य पक्षी मोर के कुल का है जो कि फिसिएनीडी परिवार का है
कहाँ देखने को मिलता है यह पक्षी
हिमालय पर्वत के ऊंचे बर्फीले भागों का पक्षी है। इस को भारत पाकिस्तान के सीमावर्ती भागों से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 2300 मीटर से 5000 मीटर तक की ऊंचाई वाले भागों में देखा जा सकता है
उत्तराखंड ,हिमांचल ,सिक्किम ,अरुणाचल प्रदेश में इनकी संख्या अधिक है, यह नेपाल, भूटान ,पाकिस्तान ,चीन ,तिब्बत अफगानिस्तान, में भी पाया जाता है।
कहाँ रहता है
मोनाल बर्फीले मैदानों, पहाड़ी जंगलों ,छोटी झाड़ियों, घास वाले पथरीले चट्टानी ढलानों में अकेले या छोटे छोटे छंदों में रहना पसंद करता है ।जो सर्दियों के आरंभ में तराई क्षेत्रों में आ जाता है लेकिन वसंत ऋतु के प्रारंभ होते ही वह पुनः ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में चला जाता है
यह देवदार के पेड़ों पर रहना पसंद करता है जहां तक मानव सरलता तक नहीं पहुंच सकता , ये एक शर्मिला पक्षी है। मोनाल की बर्फ या जमीन खुरचने की आदत होती है ,जो दिन भर अपने शक्तिशाली चौच से जमीन अथवा बर्फ को खुरचता रहता है यह रात को बसेरा चट्टानों या देवदार के पेड़ों पर करता है।
मोनाल विश्व की सुंदरतम पक्षियों में से एक है। इसको हिमालय मोर की संज्ञा भी प्रदान की गई है इस का वैज्ञानिक नाम लोफोफोरस इम्पेजेन्स है, ये उत्तराखंड का राज्य पक्षी है व नेपाल का राष्ट्रीय पक्षी है , इसे नेपाल की स्थानीय भाषा में मान्याल या मुन्याल कहते हैं
ये उड़ीसा के राज्य पक्षी मोर के कुल का है जो कि फिसिएनीडी परिवार का है
कहाँ देखने को मिलता है यह पक्षी
हिमालय पर्वत के ऊंचे बर्फीले भागों का पक्षी है। इस को भारत पाकिस्तान के सीमावर्ती भागों से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 2300 मीटर से 5000 मीटर तक की ऊंचाई वाले भागों में देखा जा सकता है
उत्तराखंड ,हिमांचल ,सिक्किम ,अरुणाचल प्रदेश में इनकी संख्या अधिक है, यह नेपाल, भूटान ,पाकिस्तान ,चीन ,तिब्बत अफगानिस्तान, में भी पाया जाता है।
कहाँ रहता है
मोनाल बर्फीले मैदानों, पहाड़ी जंगलों ,छोटी झाड़ियों, घास वाले पथरीले चट्टानी ढलानों में अकेले या छोटे छोटे छंदों में रहना पसंद करता है ।जो सर्दियों के आरंभ में तराई क्षेत्रों में आ जाता है लेकिन वसंत ऋतु के प्रारंभ होते ही वह पुनः ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में चला जाता है
यह देवदार के पेड़ों पर रहना पसंद करता है जहां तक मानव सरलता तक नहीं पहुंच सकता , ये एक शर्मिला पक्षी है। मोनाल की बर्फ या जमीन खुरचने की आदत होती है ,जो दिन भर अपने शक्तिशाली चौच से जमीन अथवा बर्फ को खुरचता रहता है यह रात को बसेरा चट्टानों या देवदार के पेड़ों पर करता है।
मोनाल
