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उत्तराखंड के 10 नये प्रश्न तथ्यों के साथ
1.उत्तराखंड में रन ऑफ द रिवर तकनीक क्या है
अ- नदी का बहाव पानी को
ब-नदी सुरंग प्रणाली से ले जाना
उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं में अधिकतर सुरंग प्रणाली अर्थात वन ऑफ द रिवर तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है इस तकनीकी में नदियां प्राकृतिक मार्ग की जगह सुरंगों के माध्यम से अपना रास्ता तय करती हैं इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और इससे नदी की गुणवत्ता भी बनी रहती है
2. कृषि कवच योजना क्या है
1. दुर्घटना बीमा
2.किसान ऋण योजना
इस योजना के अंतर्गत सीमांत एवं गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले किसानों को निशुल्क दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जाता है इसके अंतर्गत ₹50000 की राशि उपलब्ध कराई जाती है
3. सिकरा किसे कहा जाता था
1.सीकर अधिकारी को
2. ग्राम देवता को
कुमाऊ के शासन में मांस के लिए पालकर रखे जाने वाले सुरक्षित पशुओं को सीकर कहा जाता था और सीकर के अधिकारी को सिकरा या सांका कहा जाता था
4. गरुड़ा कार वेदिका कहां स्थित है
1.कालसी के निकट जगत ग्राम में
2.चमोली के निकट रोनीचोरा में
कालसी के निकट जगत ग्राम में स्थलों के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं यहीं से गरुड़ाकार वेदिका भी प्राप्त हुई है ,यह वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है गरुड़ाकार वेदिका का निर्माण करने के लिए 1000 ईंटो को इस क्रम से स्थापित किया गया था कि वह उड़ते हुए गरुड़ की आकृति स्पष्ट हो सके ,जगत ग्राम में वेदिका बनाने के लिए ईटों को त्रिभुजाकार , आयताकार और समचतुर्भुज आकार के माप से स्थापित किया गया है और जगत ग्राम की वेदिका की तिथि अभिलेख साक्ष्यों के आधार पर तीसरी शताब्दी के अंत व चौथी शताब्दी के प्रथम चरण में स्वीकार की जाती है और इनके कारीगरों
को "ओढ़ या मिस्त्री" भी कहा जाता था
5. 16वीं से 19वीं शताब्दी के मध्य काल में जम्मू से
गढ़वाल तक जो चित्रकला प्रचलित रही उसे हम कहते हैं
पहाड़ी शैली
गढ़वाल शैली
16 से 19 वीं सदी के मध्य जम्मू के मध्य से लेकर गढ़वाल तक जो चित्रकला प्रचलित रही ,उसे हम पहाड़ी चित्रकला शैली के नाम से जाने जाते हैं ,गढ़वाली चित्र शैली भी पहाड़ी चित्र शैली का ही एक अंग है । गढ़वाली चित्रकला का विकास 1658 में पृथ्वीशाह के शासनकाल में श्रीनगर में हुआ था , जब यहाँ पर सलमान शिकाहो औरंगजेब के डर से अपने दो चित्रकारों श्याम दास व हरदास के साथ यहां आया था ,
गढ़वाल शैली का प्रमुख चित्रकार मंगत राम का पुत्र मौला राम तोमर था
6. उत्तराखंड का कौन सा नृत्य गुजरात के गरबा नृत्य के
समान किया जाता है
झुमैलो
चौफला
चौफला एक नृत्य गीत है इस गीत को भी स्त्री और पुरुष गोल दायरे में घूमकर गाते हैं तथा गुणाकर होकर हाथ से तालियां बजाते हैं कभी-कभी इसमें डंडों का भी इसमें प्रयोग किया जाता है यह गुजरात के गरबा नृत्य के
समान मनाया जाता है
8. कुमाऊनी भाषा में बग्वाल का अर्थ है
एक राष्ट्रीय त्यौहार
पाषाण युद्ध का पूर्वाभ्यास
कुमाऊनी भाषा में बग्वाल का अर्थ है पाषाण युद्ध का पूर्वाभ्यास , इसमें पर्वतीय योद्धाओं की विशिष्ट स्मारक प्रक्रिया महाभारत व पाषाण से जुड़ा हुआ है और इसी परंपरा में कुमाऊं में इस उत्सव का जो आयोजन होता है कई स्थानों पर काली कुमाऊं में जो प्रचलित है इसी से जुड़ा देवीधुरा मेला जिसे महर और फडतायालो के बीच इसका आयोजन किया जाता था , इसमें कई लोग जख्मी हो जाते थे , 1815 में अंग्रेजो के द्वारा इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था । और आज भी हर श्रावणी पूर्णिमा जिसका असाडी मेला नाम भी है ये देवी धुरा मेला रक्षाबंधन को आयोजित होता है।
9. वैरीतोक (तीरंदाजी) किस जनपद में आयोजित
होता है
चमोली
बागेश्वर
वैरितोक का अर्थ होता है निशानेबाजी यह चमोली जनपद की नीति माणा में घनसाली गांव में प्रति वर्ष आषाढ़ संक्राति में आयोजित किया जाता है वैरितोक अर्थ होता है शत्रु पर निशाना साधना ,यह उत्सव उत्तराखंड में चंद शासनकाल में हुआ था जब यहां पर एक गांव दूसरे गांव पर आक्रमण करके लूटमार किया करते थे और तब नीति गांव की रक्षा के लिए गमसाली के लिए कुछ वीरों को गांव की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई , इन वीरों द्वारा गाँव को भी तीर धनुष चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता था , और आक्रमण होने पर तीर धनुष से निशाना लगाया जाता था,
10. जिम कार्बेट नेशनल पार्क म्यूजियम कहां स्थित है
कालाढूंगी
FRI
जिम कार्बेट नेशनल पार्क म्यूजियम कालाढूंगी नैनीताल में स्थित है , विश्व प्रसिद्ध कार्बेट राष्ट्रीय पार्क से 35 किलोमीटर दूर कालाढूंगी में है , जो रामनगर हल्द्वानी मोटर मार्ग पर स्थित है, यह एक पर्यटक स्थल है,
इस म्यूजियम में जिम कार्बेट के शिकार करने संबंधित सभी स्मृति के साहित्य, अभिलेखों ,स्मृतचिन्हों को संरक्षित किया गया है।
