Lyrics has been copied to clipboard!
उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल
उत्तराखंड का ब्रह्मकमल कुछ अन्य जानकारी के साथ
जो शायद हर कोई नही जानता होगा
![]() |
| उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल |
1. उत्तराखंड में ब्रह्मकमल की 24 प्रजातियां पाई जाती हैं
2.ब्रह्म कमल को महाभारत में सुगंधित पुष्प कहा गया है
3. उत्तराखंड का राजकीय पुष्प ब्रह्म कमल का वैज्ञानिक नाम सोसूरिया अबवेलेटा है
इसका नाम स्वीडन के वैज्ञानिक डी सोसेरिया के नाम पर रखा गया था।
4. ब्रह्म कमल 4800 - 6000 मीटर ऊंचाई पर पाए जाने वाला पुष्प है
5. यह उत्तराखंड के मध्य हिमालयी छेत्र में पाया जाता है
6 ब्रह्म कमल ऐसटेरसी कुल का पौधा है
ब्रह्म कमल एस्टेरेसी कुल का पौधा है। सूर्यमुखी, गेंदा, डहलिया, कुसुम एवं भृंगराज
इस कुल के अन्य प्रमुख पौधे हैं
7. ब्रह्मा कमल कि विश्व में कुल 210 कितनी प्रजातियां पाई जाती है
भारत में लगभग 61 प्रजातियां पायी जाती हैं जिनमें से लगभग 58 तो अकेले हिमालयी
इलाकों में होती हैं।
8. उत्तराखंड में पाई जाने वाली प्रजाति हैं ब्रह्म कमल, फेन कमल , कस्तूरा कमल
9. कस्तूरा कमल प्रजाति के पुष्प बैगनी रंग के होते हैं
10. ग्रार्मीनिफोलिया, ब्रह्मकमल की फेन कमल का प्रजाति का वैज्ञानिक नाम है
11. उत्तराखंड में ब्रह्म कमल को दूसरे कौंल पदम नाम से जाना जाता है। ब्रह्मकमल को अलग-अगल जगहों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे उत्तरखंड में ब्रह्मकमल (कौंल पदम ), हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस इसके नाम से जाना जाता हैं।
12. ब्रह्मकमल भारत के हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, कश्मीर में पाया जाता है।
13. भारत के अलावा यह नेपाल, भूटान, म्यांमार, पाकिस्तान में भी पाया जाता है।
14. हिमाचल में कुल्लू के कुछ इलाकों में, उत्तराखंड में यह पिण्डारी, चिफला, रूपकुंड, हेमकुण्ड, ब्रजगंगा, फूलों की घाटी, केदारनाथ आदि दुर्गम स्थानों पर ही मिलता है।
15. इस फूल के कई औषधीय उपयोग भी किये जाते हैं। इसके राइज़ोम में एन्टिसेप्टिक होता है जिसे जले-कटे में इसका उपयोग किया जाता है। यदि जानवरों को मूत्र संबंधी समस्या हो तो इसके फूल को जौ के आटे में मिलाकर उन्हें पिलाया जाता
16.भोटिया जनजाति के लोग गांव में रोग-व्याधि न हो, इसके लिए इस पुष्प को घर के दरवाजों पर लटका देते हैं।
17. ब्रह्मकमल का अर्थ है ‘ब्रह्मा का कमल’
18. यह मां नन्दा का प्रिय पुष्प है। इसे नन्दाष्टमी के समय में तोड़ा जाता है और इसके तोड़ने के भी सख्त नियम होते हैं जिनका पालन किया जाना अनिवार्य होता है।
19.यह फूल अगस्त के समय में खिलता है और सितंबर-अक्टूबर के समय में इसमें फल बनने लगते हैं। इसका जीवन 5-6 माह का होता है
20 .इस पुष्प की मादक सुगंध का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है जिसने द्रौपदी को इसे पाने के लिए व्याकुल कर दिया था
21. कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु हिमालय क्षेत्र में आए तो उन्होंने भोलेनाथ को 1000 ब्रह्म कमल चढ़ाए, जिनमें से एक पुष्प कम हो गया था। तब विष्णु भगवान ने पुष्प के रुप में अपनी एक आंख भोलेनाथ को समर्पित कर दी थी। तभी से भोलेनाथ का एक नाम कमलेश्वर और विष्णु भगवान का नाम कमल नयन पड़ा
22. यह पुष्प अन्य पुष्पों की भांति सुबह नहीं खिलता है , आम तौर पर फूल सूर्यास्त के बाद नहीं खिलते, पर ब्रह्म कमल एक ऐसा फूल है जिसे खिलने के लिए सूर्य के अस्त होने का इंतजार करना पड़ता है।इसका खिलना देर रात आरंभ होता है तथा दस से ग्यारह बजे तक यह पूरा खिल जाता है। मध्य रात्रि से इसका बंद होना शुरू हो जाता है और सुबह तक यह मुरझा चुका होता है।
23.सितंबर-अक्तूबर के समय में यह पुष्प फल में परिवर्तित होने लगता है।

