अल्मोड़ा के बाजार क्षेत्र में स्थित नंदा देवी मंदिर की स्थापना किस शासक ने की??
बाजार क्षेत्र में स्थित इस प्राचीन व अत्यन्त गहन श्रद्धा व मान्यता का नन्दादेवी मन्दिर शोभनीय है। इस मन्दिर की स्थापना राजा बाजबहादुर चन्द (1638-78 ई.) द्वारा की गई। इतिहासकार एटकिन्सन के अनुसार बाजबहादुर द्वारा अपने गुरु की आज्ञा पर गढ़वाल से नन्दा देवी की मूर्ति को उठाकर विजय को प्रतीकपूर्ण करने के उद्देश्य से लाते हुये जब नन्दा का डोला विश्राम के लिये वैजनाथ में रखा तो वह फिर उठ ही न सका । तब चन्द राजा ने देवी को अपनी कुलदेवी बनाने की शपथ, प्रार्थना व अनुनय विनय कर पूजा-अर्चना की। उसे मल्लामहल, वर्तमान में कचहरी, अल्मोड़ा में स्थापित किया। यह इतिहास का नया पन्ना है
जिसके अनुसार ब्रिटिश अधिकारी ट्रैल ने अपनी प्रशासकीय सुविधा के लिये मूर्ति को तल्लातल में स्थापित कर दिया किन्तु इस अधिकारी की आँखों की ज्योति चली गई। जनभावनाओं का आदर कर जब उसने क्षमा-प्रार्थना व अनुष्ठान कर पुनः नन्दादेवी को उसी स्थान पर स्थापित किया तो उसकी नेत्र ज्योति ठीक हो गई। जनश्रुतियों में और भी कई अन्य मान्यतायें इसके बारे में चलती हैं। दुर्गा सप्तशती में वर्णित आद्य शक्ति नन्दा देवी है। इस प्राचीन मन्दिर परिसर में प्राचीन शिव मन्दिर भी है। 16 वीं शताब्दी से राजा बालाकल्याण चन्द के । समय से यहाँ प्रतिवर्ष अद्यतन भाद्रपद शुक्ल को नन्दादेवी का विशाल मेला लगता है। अष्टमी समूचे अल्मोड़ा सहित दूर-दूर से श्रद्धालु माँ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उमड़ पड़ते हैं।
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