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उत्तराखंड के 22 वर्ष होने पर क्या विकास हुआ। समीक्षा कीजिये PCS मैंस
वर्ष -2001
* रुड़की विश्वविद्यालय बना आईआईटी रुड़की
* उत्तराखंड में महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण 20% करने का फैसला लिया गया था
* वर्ष 2006 में महिलाओं के आरक्षण को 30% बढ़ा दिया गया
उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी जी की सरकार ने 18 जुलाई 2001 को उत्तराखंड मूल की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 20% से अधिक आरक्षण देने का फैसला किया इसके बाद एनडी तिवारी सरकार ने 24 जुलाई 2006 को इसे बढ़ाकर 30% कर दिया.हाल ही में हाईकोर्ट ने क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगाई थी,जिस पर धामी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है वर्तमान मे राज्य मे महिलाओ के लिए 30% आरक्षण लागू रहेगा
वर्ष -2002
*उत्तराखंड के देहरादून में सचिवालय विधानसभा भवन स्थापित किए गए
*उद्योगों के लिये सिडकुल का गठन
*राज्य गठन से पूर्व 2000 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र था
वर्तमान में 8000 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकास हो चुका है
प्रदेश में उद्योगों की स्थापना और सुविधाओं के अवस्थापना विकास के लिए 2002 में उत्तराखंड राज्य औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास निगम लिमिटेड ( सिडकुल ) का गठन किया गयो । सिडकल अब तक प्रदेश में लगभग 8000 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर चुका है । इसमें सेलाकुई , आईटी पार्क , बीएचईएल हरिद्वार , पंतनगर , सितारगंज फेज एक और दो , सिगड्डी कोटद्वार शामिल हैं । राज्य बनने से पहले प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र के अधीन लगभग दो हजार एकड़ क्षेत्रफल था ।
वर्ष -2003
* वर्ष 2003 में देहरादून नगरपालिका को नगर निगम बनाया गया
* विशेष औद्योगिक पैकेज 14 हजार उद्योग राज्य गठन से पूर्व थे700 करोड़ का हुआ था निवेश
उत्तराखंड में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए विशेष पैकेज मिला । इस पैकेज की बदौलत राज्य में नए उद्योग स्थापित करने में तेजी आई । राज्य बनने से पहले प्रदेश में कुल 14163 एमएसएमई उद्योग थे । इसमें 700 करोड़ का निवेश किया गया था , लेकिन विशेष पैकेज से उद्यमी निवेश के लिए उत्तराखंड की तरफ आकर्षित हुए ।
वर्ष -2004
*देहरादून में आईएसबीटी ISBT की स्थापना और ऋषिकेश एम्स की सौगात
*वर्ष 2004 में आईएसबीटी की स्थापना की गई । एमडीडीए ने इसका निर्माण किया । इससे उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के साथ दूसरे राज्यों के लिए भी बस कनेक्टिवी की सुविधा प्रदेशवासियों को मिली ।
इसी साल तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऋषिकेश में भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स ) का शिलान्यास किया, इसका कार्य पूर्ण होने के बाद वर्ष 2012 से एम्स का संचालन किया गया ।
वर्ष -2005
वर्ष -2006
* ऋषिकेश में जानकी सेतु की आधारशिला रखी गई.
*2006 में उत्तरांचल से उत्तराखंड नाम बदला गया
राज्य का नाम उत्तरांचल से बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया केंद्र सरकार ने 29 दिसंबर 2006 को इसकी अधिसूचना जारी की 1 जनवरी 2007 से राज्य का नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया।
वर्ष -2007
वर्ष -2008
*108 एंबुलेंस मिली और जौलीग्रांट एयरपोर्ट का संचालन हुआ शुरू
*350 से अधिक एंबुलेंस चलती हैं 108 सेवा में
*800 से अधिक कर्मचारी 108 में सेवाएं दे रहे हैं
*एयर पोर्ट 28 फ्लाइट की सेवाएं संचालित होती है
*वर्तमान में उत्तराखंड में 83 हेलीपैड है
मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए मई 2008 में उत्तराखंड को इमरजेंसी सेवाओं के लिए 108 एंबुलेंस की सौगात मिली । वर्तमान में इस सेवा में 800 से अधिक कर्मचारी हैं और 350 से अधिक एंबुलेंस संचालित है । यह सेवा पहाड़ों के लिए लाइफ लाइन साबित हुई । मार्च 2008 में जौलीग्रांट एयरपोर्ट से हवाई सेवाएं शुरू हुई । फरवरी 2009 में एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया गया । वर्तमान में जौलीग्रांट से 28 फ्लाइट संचालित हैं । इसके अलावा जौलीग्रांट , पंतनगर , पिथौरागढ़ के नैनी सैनी एयरपोर्ट , गौचर में हवाई पट्टी के अलावा 83 हेलीपैड हैं ।
वर्ष -2009
* NIT की हुई स्थापना और केंद्रीय विश्वविद्यालय मिला
*300 एकड़ की जमीन है एनआईटी के पास
*1973 में हुई थी गढ़वाल विवि की स्थापना
पौड़ी जिले के श्रीनगर के सुमाड़ी में हुई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान ( एनआईटी ) की स्थापना हुई । इस संस्थान में वर्ष 2010-11 में पहला बैच शुरू हुआ । इसके लिए 300 एकड़ भूमि उपलब्ध हुई है । इसमें पहले चरण में 60 एकड़ में एडम ब्लॉक और 1260 छात्र - छात्राओं के लिए परिसर का निर्माण किया जा रहा है । इसी साल 15 जनवरी को गढ़वाल विश्वविद्यालय बना केंद्रीय विश्वविद्यालय । हेमवंती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की स्थापना 23 नवंबर 1973 हुई थी । ये विश्वविद्यालय उत्तराखंड के सबसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से एक है ।
वर्ष -2010
वर्ष -2011
* इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट की सौगात मिली
वर्ष -2012
वर्ष -2013
केदारनाथ आपदा के बाद एसडीआरएफ का गठन किया गया
* गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन की नींव रखी गई
* 2014 में हरीश रावत सरकार ने तंबू लगाकर विधानसभा सत्र में कैबिनेट बैठक भी किया
गैरसैण स्थित भराड़ीसैंण में विधानसभा का शिलान्यास हुआ इसी साल विजय बहुगुणा सरकार के समय पहली बार गैरसैंण में कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, अभी वर्तमान में भराड़ीसैंण में विधानसभा का भव्य भवन बनके तैयार है इसके अलावा मंत्रियों,विधायकों,अधिकारियों के लिए आवास का निर्माण भी कर दिया गया है ,वर्ष 2014 में हरीश रावत सरकार ने पहली बार गैरसैण में तंबू लगाकर विधानसभा सत्र शुरू किया, उस वक्त भराड़ीसैंण में कोई कोई स्थाई विकास नहीं हुआ था जिससे मंत्रियों विधायकों समेत अधिकारियों को टेंट में रहना पड़ा। इसके बाद ही वहाँ पर विकास का पथ आगे बढ़ा था ।
वर्ष -2016
*ऑल वेदर रोड परियोजना का शुभारंभ
*889 किलोमीटर लंबी सड़क पर योजना का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन
दिसंबर 2016 में करीब 12000 करोड रुपए की 889 किलोमीटर लंबी ऑल वेदर रोड परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने किया था तब तक करीब 85% काम पूरा हो चुका था ऑल वेदर रोड राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित हो गई है
वर्ष -2018
*उत्तराखंड सरकार ने शुरू की राज्य आयुष्मान योजना
*48 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बन बने
*23 लाख परिवारों को इलाज मे दी गई की सुविधा
25 दिसंबर 2015 से राज्य आयुष्मान योजना शुरू हुई । इसमें सभी 23 लाख परिवारों को पांच लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई । अब तक योजना में 48.55 लाख लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं । अब तक 5.97 लाख लाभार्थियों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है । इस पर सरकार ने 1052 करोड़ की राशि खर्च की है । एक जनवरी 2021 से प्रदेश के सभी राजकीय कर्मचारियों और पेंशनरों को आयुष्मान में राज्य स्वास्थ्य स्कीम के तहत गोल्डन कार्ड पर कैशलेस इलाज की सुविधा शुरू की थी ।
वर्ष -2019
जिम रानी बहुत देर से बांध परियोजना की सौगात
*ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर काम शुरु
*16 हजार करोड़ रुपये की लागत से 125.20 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना का कार्य शुरू
2019 में ऋषिकेश - कर्णप्रयाग रेल परियोजना का शुरू हुआ । 125.20 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं । परियोजना में 84.24 फीसदी रेलवे ट्रैक सुरंगों के बीच से गुजरेगा । एक सुरंग करीब 20 किलोमीटर लंबी है और यह हिमालयी राज्यों में सबसे लंबी होगी । ट्रेन 35 पुलों और 17. सुरंगों से गुजरेगी । शिवपुरी और ब्यासी स्टेशनों को छोड़कर बाकी सभी 10 स्टेशनों का ज्यादातर हिस्सा सुरंगों वाला होगा । परियोजना के पूरा होने से चीन की सीमा तक सेना की पहुंच आसान हो जाएगी ।
वर्ष -2020
*देश का सबसे लंबा सस्पेंशन ब्रिज डोबरा चांठी का शुभारम्भ
* चमोली जिले में स्थित गैरसैंण बनी उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी
BJP सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने 4 मार्च 2020 को भराड़ीसँण विधानसभा में बजट सत्र के दौरान गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की थी । इसके साथ उन्होंने गैरसैण को अलग से मंडल बनाने की एलान किया था । हालांकि मंडल बनाने की घोषणा सिरे नहीं चढ़ पाई है । इसके लिए काफ़ी हंगामा भी हुआ, इसके बाद मण्डल बनाने के प्रस्ताव को नये मुख्यमंत्री मंत्री ने स्थगित कर दिया था।
वर्ष -2022 मे क्या?
*केदारनाथ और हेमकुंड रोपवे का शिलान्यास
*हेमकुंड साहिब के लिए 12 किमी का दुनिया का सबसे ऊंचा रोपवे चमोली जिले मे बनेगा
*राज्य के सीमांत गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए 1202 मोबाइल टॉवरों को मिली मंजूरी
वर्ष 2022 मे अक्टूबर माह मे उत्तराखंड राज्य के दौरे पर आये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गौरीकुंड से केदारनाथ तक करीब 9 किलोमीटर और गोविंदघाट से हेमकुंड तक करीब 12 किलोमीटर के दो रोपवे का शिलान्यास किया । 2024 तक इन्हें पूरा करने का लक्ष्य है । केंद्र ने राज्य के सीमांत गावों में मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए बीएसएनएल के 1202 मोबाइल टॉवरों को मंजूरी दी ।
सिविल जज परीक्षा 2021-22: सिविल जज भर्ती परीक्षा एडमिट कार्ड जारी
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से आधिकारिक वेबसाइट ukpsc.gov.in से सिविल जज भर्ती का एडमिट कार्ड नई दिल्ली उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा सिविल जज के पदों के लिए जारी रिक्तियों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए राहत की खबर है। आयोग द्वारा सिविल जज भर्ती परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया है।
राज्य में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर आया है (सरकारी नौकरी 2022)। आवेदन करने वाले उम्मीदवार यूकेपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट https://ukpsc.gov.in/ पर जाकर एडमिट कार्ड देख सकते हैं।
उत्तराखंड में सिविल जज के पद के लिए इस वैकेंसी (UKPSC सिविल जज भर्ती 2022) के लिए आवेदन की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2021 से शुरू हुई थी।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से सिविल जज के रिक्त पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जनवरी 2022 निर्धारित की गई है। इस परीक्षा के माध्यम से कुल 13 पदों पर भर्ती की जाएगी।
ऐसे में जो उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्ध नोटिफिकेशन को अच्छी तरह चेक कर लें.
एडमिट कार्ड कैसे डाउनलोड करें
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ukpsc.gov.in पर जाएं।
वेबसाइट के होम पेज पर हाल के अपडेट पर क्लिक करें।
अब “उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल जज (न्यायाधीश), प्रारंभिक परीक्षा-2021 के एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के संबंध में” लिंक पर जाएं।
यहां डाउनलोड एडमिट कार्ड के लिंक पर क्लिक करें।
अब उम्मीदवार अपना आवेदन संख्या और पासवर्ड दर्ज करें।
सबमिट करने के बाद स्क्रीन पर एडमिट कार्ड खुल जाएगा।
प्रवेश पत्र डाउनलोड करें और आगे उपयोग के लिए एक प्रिंट आउट लें।
टेक्नीशियन के 306 पदों की परीक्षा मार्च महीने में होगी
उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा टेक्नीशियन संवर्ग के 306 पदों की लिखित परीक्षाएं तय की है । बोर्ड की ओर आवेदन करने वाले 2 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र वेबसाइट पर जारी कर दिए हैं । उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड टेक्नीशियन संवर्ग के 306 पदों की लिखित परीक्षा मार्च में आयोजित की जाएगी । इसमें
रेडियोग्राफिक, टेक्नीशियन पद की- 5 मार्च
लैब टेक्नीशियन की -6 मार्च
ओटी टेक्नीशियन , सीएसएसडी टेक्नीशियन , रेडियोथेरेपी टेक्नीशियन , ईसीजी , ऑडियोमेट्री टेक्नीशियन , डेंटल , फिजियोथेरेपिस्ट , ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट , रिफ्रेक्शनिष्ट पदों की परीक्षा - 13 मार्च को होगी
UTTARAKHAND GK UPDATES
BARTWAL TOPIC
बर्त्वाल क्षत्रियों का संक्षेप में विश्लेषण 🙏
- कौन होते है बर्त्वाल?
- इन्हें बर्त्वाल की संज्ञा क्यों प्रदान की गई है?
- बर्त्वाल किस राजवंश से सम्बन्ध रखते हैं?
- क्या बर्त्वाल और बर्थवाल जाती एक ही?
- यह किस के उपासक /पूजा /आराध्य करते हैं
- बर्त्वाल जाती के आम बोलचाल से कुछ शब्द
कौन होते है बर्त्वाल
उत्तराखंड मे काफ़ी सारी जातियाँ होती हैं उन्हीं जाती यानी कस्ट मे एक नाम आता है बर्त्वाल जाती का,बर्त्वाल एक पहाड़ी क्षत्रिय जाति है यह राजवंश मे इस लिए भी प्रमुख मानी जाती है क्यों की बर्त्वाल जाती के लोग काफ़ी साहसी निडर और निर्भीक होते थे इस लिए उत्तराखंड मे बर्त्वाल वंश से हार एक परिचत होगा
इन्हें बर्त्वाल की संज्ञा क्यों प्रदान की गई है?
बर्त्वाल 9 शताब्दी ई० में धारानगरी–उज्जैन से आकर गढ़वाल में बस गए थे। इनका पहला गांव रडुवा–चंदनीखाल (उल्काखाल) जो गढ़वाल के इतिहास में बर्तगढ के नाम से जाना जाता था कालांतर में खदेड़ पट्टी के नाम से प्रसिद्ध हुआ, नेपाल के गोरखाली आक्रमण के दौरान बर्तवाल बहादुरों ने आक्रमणकारियो को हराकर वहाँ से खदेड़ा था जिसके कारण उस क्षेत्र का नाम खदेड़ पट्टी पड़ा ।पूरे गढ़वाल क्षेत्र में केवल खदेड़ में ही गोरखे १० बरसों के अपने राज में कब्जा नहीं कर सके क्योकि बर्तवाल बीरों ने उनको हर बार बुरी तरह से पराजित किया। और आज इसी खदेड पट्टी से ये रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और उत्तरकाशी और पौड़ी के कुछ क्षेत्रों में बस गए।
बर्त्वाल किस राजवंश से सम्बन्ध रखते हैं
यह परमार राजवंश की एक उपशखा है जो बाद में अपभ्रंश होकर पंवार हो गई अपने प्रण को पूरा करने के विशेष गुण के फलत: इनको बर्त्वाल उपनाम से जाना जाने लगा जो कालांतर में इनकी प्रमुख जाति नाम हो गया, यानी परमार राजवंश के दो गुट हो गए थे. पंवार राजवंश और बर्त्वाल राजवंश.
क्या बर्त्वाल और बर्थवाल जाती एक ही हैं
यह बात सामन्यत: देखीं जाती है की हम बर्त्वाल और बर्थवाल जाती को एक ही समझें की भूल किया करतें हैं उत्तराखंड के पौड़ी जिले मे रहने वाले बर्थवाल और बर्त्वाल जाती का आपस मे कोई तालमेल नहीं है पौड़ी मे जन्मे बर्थवाल जाती एक ब्राह्मण जाति है और बर्त्वाल एक ठाकुर यानी राजवंशी जाती है जिन्हे हम छत्रिय कहते हैं.कई बार लोग दोनो जातियों एक समझने लगते हैं.
यह किस कि पूजा /आराध्य करते हैं
बर्त्वालो की इस्ट देवी दक्षिण कलिंका भवानी है आज भी इनका मंदिर बर्त्वालो के प्रथम गांव रडुआ में है और कई जगह इनकी पूजा राजराजेश्वरी देवी के रूप में भी जाती हैं। बर्त्वाल लोग अपने नाम के आगे "ठाकुर" और नाम और जाति के बीच में "सिंह "का उपयोग होता है। इनका गोत्र भारद्वाज है। यह राजराजेश्वरी देवी के उपासक रहे है और इन्ही को अपनी ईस्ट यानी कुल देवी के रूप मे पूजते हैं
बर्त्वाल जाती के आम बोलचाल से कुछ शब्द
बर्त्वाल जाती हमेशा ही गढ़वाली भाषा का प्रयोग करती रही है है और आज भी उनके वंशज गढ़वाली भाषा का प्रयोग ही अपनी भाषा मे करते हैं लेकिन ये हार एक वंश मे होता है की कुछ शब्द थोड़ा अलग होते ही है तो इसमें बर्त्वालो के वंश में सबसे अलग यह है की ये अपने माता पिता को "जिया–बबाजी" या जिया–पिताजी",ससुर को "दीवान जी"और सास को "जी" कहकर बुलाते है,बर्त्वालो में "जदेसा" अभिवादन के रूप मे उपयोग किया जाता है,जो पहले गढ़वाल राजवंश के लोग भी किया करते थे।
बर्त्वाल जाती के प्रसिद्ध व्यक्तियों पर एक लेख
- जसू बर्त्वाल और पंचमू बर्त्वाल
- भीम सिंह बर्त्वाल और उदय सिंह बर्त्वाल
- भीमसेन बर्तवाल
- ठाकुर धन सिंह बर्तवाल
- स्वामी सच्चिदानंद स्वामी(सज्जन सिंह बर्तवाल)
- चंद्र कुंवर बर्तवाल
जसू बर्त्वाल और पंचमू बर्त्वाल –ये दोनो ही प्रसिद्ध योगी रहे हैं इनका कई बार भैरव जागर, नरसिंग जगरो में इनका जिक्र आता है लेकिन इनके बारे में उपयुक्त जानकारी नहीं है।
भीम सिंह बर्त्वाल और उदय सिंह बर्त्वाल–ये दोनो भाई जिन्हे बर्तवाल बंधुओ के नाम से जाना जाता था वह राजा महिपति शाह के सेनापति थे जिन्होंने गढ़वाल की सीमा को दक्षिणी तिब्बत (दाबा गढ़)को विजित कर उस राज्य को राजा के अधीन कर वहा का प्रशासन संभाला। कुछ सालो बाद वहा दाबा के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। आज भी बर्त्वाल बंधुओ की तलवारे दाबा के थोलिंग मठ में विजय समारक के रूप में रखी हुई हैं जिनकी पूजा आज तक होती है।
भीमसेन बर्तवाल–ये मुगल दरबार में 1658–1678 ई० तक मनसबदार के पद पर नियुक्त थे,इनको 1000सवार और 600 जातियों का मनसब मिल रखा था बाद में इन्होंने मदन सिंह भंडारी ने मिल कर पंचभयाखाल में पांच भाई कठैतो को उनकी "कठैतगर्दी" के कारण खत्म किया ,इनको खत्म करने की योजना पुरिया नैथानी ने बनाई थी , भीमसेन की बहन महारानी बर्तवाली जो कि फतेहपति शाह की 7 साल तक संरक्षिका रही थी उस समय तक रानी बर्तवाली और रानी सिरमौरी ने ही गढ़वाल का शासन चलाया।
ठाकुर धन सिंह बर्तवाल–ये तल्ला नागपुर के सतेरा स्युपुरी गांव के मालगुजार हुआ करते थे।ये भगवान बद्रीनाथ के बड़े भक्त थे इनके द्वारा भगवान बद्रीनारायण की सुप्रसिद्ध आरती “पवन मंद सुगंध शीतल ” सन 1881 इ० में लिखी गई थी। इन्ही के गांव में और भी कई अन्य प्राचीन पांडुलिपी मिली है जिनमे गढ़वाल के राजवंश,आयुर्वेद,गढ़वाल के अन्य इतिहासो के बारे में जानकारी मिलती है
स्वामी सच्चिदानंद स्वामी(सज्जन सिंह बर्तवाल)–इनका जन्म 1885 में तल्ला नागपुर के चमस्वाड़ा गांव में हुआ था,ये जन्म से ही अंधे पैदा हुए थे इन्हें आधुनिक रुद्रप्रयाग का प्रणेता माना जाता है, इन्होंने रुद्रप्रयाग में 1944 में मिडिल स्कूल की स्थापना जो कि बाद में राजकीय इंटर कॉलेज, संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना, चिकित्सालय,पशु चिकित्सालय निर्माण, सुरंग निर्माण, गुलाबराय मैदान, धर्मशाला के निर्माण आदि जनसरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर महाराज जी ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
चंद्र कुंवर बर्तवाल–इनका जन्म 20 अगस्त 1919 में मालकोटी * पट्टी तल्ला नागपुर,रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड, भारत में हुआ था। ये हिंदी के कवि थे जिन्हे हिंदी का कालिदास भी कहा जाता है,प्रकृति के चितेरे कवि, हिमवंत पुत्र बर्त्वाल जी अपनी मात्र 28 साल की जीवन यात्रा में हिन्दी साहित्य की अपूर्व सेवा कर अनन्त यात्रा पर प्रस्थान कर गये। 1947 में इनका आकस्मिक देहान्त हो गया।
इन्हों ने हिंदी में कई प्रसिद्ध रचनाएं की जैसे–
नंदिनी/ चन्द्रकुंवर बर्त्वाल
मेघकृपा / चन्द्रकुंवर बर्त्वाल
पयस्वनी/ चन्द्रकुंवर बर्त्वाल
काफ़ल पाकू / चन्द्रकुंवर बर्त्वाल
रैमासी / चन्द्रकुंवर बर्त्वाल
हिमशृंग / चन्द्रकुंवर बर्त्वाल
मैकाले के खिलौने / चन्द्रकुंवर बर्त्वाल
उस दिन के बादल / चन्द्रकुंवर बर्त्वाल इत्यादि ।
इसके अतिरिक्त गढ़वाल के प्रथम मानचित्रकार स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह बर्त्वाल, जिन्हें मानचित्र बनाने पर पुरुस्कार स्वरूप'गोल्ड मैडल' से पुरस्कृत किया गया परन्तु उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। एवं वर्तमान समय में चन्द्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान देहरादून के संस्थापक सचिव डाक्टर योगंबर सिंह बर्त्वाल जी अपने अथक प्रयास से पिछ्ले चालीस सालों से कविवर चन्द्रकुंवर बर्त्वाल के व्यक्तिव एवं कृतित्व को उजागर करने के महायज्ञ में पूरे मनोयोग से तल्लीन हैं। कविवर को जनमानस के बीच जिंदा रखने का उनका भगीरथ प्रयास आज भी जारी है, जिसमें अब तक उन्होंने बारह लोगों को विषय पर पी एच डी करवाई, उत्तराखंड के विभिन्न स्थलों पर सात से अधिक कविवर की मूर्तियों को स्थापित किया एवं हिंदी विषय के पाठ्यक्रम में भी हिमवंत कवि की रचनाओं को समावेशित करने का अभूतपूर्व कार्य किया। उपर्युक्त सभी कर्मयोगी मनीषीयो से भावी पीढ़ी कुछ सीख ले कर प्रेरित होगी इसी ध्येय एवं विश्वास के साथ सबको सादर प्रणाम ।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने जारी किए समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा के प्रवेश पत्र
(UKPSC RO ARO Admit Card 2021)
UKPSC समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा 2021 का एडमिट कार्ड जारी करेगा. जारी होने के बाद अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे. परीक्षा का आयोजन 23 जनवरी 2022 को किया जाना है.
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने 8 जनवरी 2022 को समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा 2021 (UKPSC RO ARO Prelims Exam 2021) के लिए एडमिट कार्ड (UKPSC RO ARO Admit Card 2021) जारी करेगा. जारी होने के बाद अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट ukpsc.gov.in से परीक्षा प्रवेश डाउनलोड कर सकते हैं. प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन 23 जनवरी 2022, रविवार को किया जाना है.
यहाँ से डाउनलोड करें
UTTARAKHAND GK UPDATES
Uttarakhand police Recruitment 2022
उत्तराखंड पुलिस भर्ती 2022 कॉस्टेबल 1521 पद व दरोगा 197 पद भर्ती
उत्तराखंड पुलिस विभाग में जल्द भर्ती शुरू होने वाली है। शासन ने सिपाहियों के 1521 पद और 197 दरोगाओं की भर्ती की अनुमति दे दी है।
काफी लंबे समय के अंतराल में यह भर्ती युवाओं के चहरे पर खुशियों की लहर ले कर आई है । इस भर्ती से काफी युवाओं के सपने साकार होने की उम्मीद जगने लगी है । उत्तराखंड सरकार द्वारा विज्ञप्ति जारी करने का आदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग उत्तराखण्ड सरकार को दिया गया है ।
कहा जा रहा है यह चुनाव के बाद प्राम्भ होने की उम्मीद जताई गई है , हो सकता है यह भर्ती आचार संहिता में ही आयोग द्वारा प्रकाशित की जाए ।
UKSSSC द्वारा यह भर्ती परीक्षा और पुलिस विभाग द्वारा शारीरिक परीक्षा आयोजित की जाएगी शारीरिक दक्षता में परीक्षार्थियों को छाती की माप ,लंबाई , दौड़ , चिनपस , बॉल थ्रो , वीम जैसी शारीरिक दक्षता को पास करना होगा । उसके बाद अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा से गुजरना होगा व जिला वार इसकी मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी ।
मेरिट में सफल होने के बाद विभाग द्वारा आप के (पत्रों) documents की जांच की जाएगी । उसके बाद ही आप को ट्रेनिग के लिए (जॉइंग लैटर ) नियुक्ति पत्र दिया जाएगा
आयु सीमा
आयु सीमा 22 से बढ़ा कर एक वर्ष अधिक कर दी गई है यानी यह आयु अब 23 वर्ष कर दी गई है ।। आयु सीमा में छूट वालों के लिए एक वर्ष अधिक आयु छूट दी गई है ।
शैक्षिणिक योग्यता
इसमें शैक्षणिक योग्यता सिपाहियों के लिए 12वी पास रखा गया है और SI भर्ती के लिए ग्रैजुएशन होना अनिवार्य है ।
इसी माह निकलेगी विज्ञप्ति
लंबे समय से कांस्टेबल भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी है। शासन ने कांस्टेबल भर्ती को संपन्न करवाने के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) को अधियाचन भेज दिया है। आयोग इसी माह भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी करेगा।
यह भर्ती नवंबर में शुरू होनी थी लेकिन आयु सीमा को लेकर इस पर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी। इसके बाद इस भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी करने पर रोक लग गई थी। अब शासन ने UKSSSC को भर्ती करवाने के लिए अधियाचन भेज दिया है। अब आयोग इस माह के अंत तक भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी करेगा। 1521 पदों पर होने वाली इस भर्ती के लिए युवा लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
माननीय मुख्यमंत्री द्वारा
प्रिय प्रदेशवासियों,
युवाओं को अधिकतम रोजगार के अवसर मुहैया कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में अन्य विभागों की तरह पुलिस विभाग के रिक्त पदों पर भी भर्ती शुरू करने का आदेश जारी किया है। सशक्त युवा ही समृद्ध प्रदेश का आधार होते हैं।
आपका
पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री
उत्तराखण्ड
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अकितरि: उत्तराखंड के भेड़ पालकों का देवता अकितरि उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र रवांई-जौनपुर तथा जौनसार-बावर के भेड़ - बकरी पालकों द्वारा बहुमान...
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UTTARAKHAND GK UPDATES दोस्तों आज हम गढ़वाली भाषा में कुछ सामान्य से प्रश्नों के उत्तर देने वाले हैं जैसे कि आप लोगों ने कई बार हमसे पूछे ह...
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देहरादून का प्रसिद्ध झंडामेला ध्वजात्सव झंडामेला ध्वजात्सव के नाम से मनाया जाने वाला यह उत्सव गुरू रामराय द्वारा प्रवर्तित उदासी सम्प्रदाय क...
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how to say happy birthday in garhwali language happy birthday in garhwali birthday wishes in garhwali language happy birthday wishes in ga...
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UTTARAKHAND GK UPDATES लोसर क्या है और यह किस जनजाति से सम्बंधित है ? तिब्बती जनजातिय बौद्ध परंपराओं के अनुसार नववर्ष को लोसर उत्सव मानते है...
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UTTARAKHAND GK UPDATES BARTWAL TOPIC बर्त्वाल क्षत्रियों का संक्षेप में विश्लेषण 🙏 BARTWAL बर्त्वाल क्षत्रियों का संक्षेप में विश्लेषण क...
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How to learn Garhwali language गढ़वाली भाषा कैसे सीखे 1.स्यामन्या नमस्ते (Namaste) Hello 2 कन छीन कैसे हो (Kaise ho?) How are ...
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मोनाल उत्तराखंड का राज्य पक्षी होने के साथ हिम का मोर भी कहलाता है मोनाल विश्व की सुंदरतम पक्षियों में से एक है। इसको हिमालय मोर की संज्ञ...
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Hindi translate to Garhwali हिन्दी शब्दों को गढ़वाली में कैसे बोला जाता है Hindi translate to Garhwali लकड़ी के ढेर को हम कटगळ कहते हैं धान ...

