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मौलाराम
चित्रकला में पहाड़ी शैली के साथ ही गढ़वाली शैली के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है गढ़वाल चित्रकला की मुगल चित्रकला से प्रभावित होकर राजपूत कला का पहाड़ी रूपांतरण है इसको सबसे पहले गढ़वाल नरेश पृथ्वी शा के दरबार में आए दो कलाकार श्याम दास और हरिदास ने विकसित किया था ।गढ़वाली चित्रकला की शैली के जन्मदाता का गौरव मौला राम को दिया जाता है
मौला राम
मौलाराम इनका जन्म सन 1873 में श्रीनगर गढ़वाल में हुआ था ,उनके पिता का नाम मंगत राम और माता का नाम रामी देवी था , उत्तराखंड की प्रसिद्ध चित्रकार होने के साथ ये अच्छे कवि भी थे
माना जाता है 1658 में जब दाराशिकाहो के पुत्र सलमान शिकाहो औरंगज़ेब के डर से छिपने के लिए गढ़वाल के राजा पृथ्वी शाह की शरण में आया था तब उनके साथ दो चित्रकार भी आए थे कुंवर श्याम दास व उनके पुत्र हरिदास ,हरिदास के पुत्र हरिलाल थे ,और उनके पुत्र मंगतराम थे ,मंगत राम के पुत्र -मौला राम हुए और ये हिमाचल प्रदेश के मूल निवासी माने जाते है इनका मूल पेशा सुनहरा करिगी था
